खैर कत्था है कमाल का औषधि

खैर के वृक्ष की लकड़ी से के बिच वाले हिस्से को पका कर कत्था बनाया जाता है . कत्था २ तरह का होता है एक लाल कत्था जो पान में लगा कर खाया जाता है. दूसरा सफ़ेद कत्था जो औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है.

प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार कत्‍था, ठंडा, कडुवा, तीखा व कसैला होता है। यह कुष्‍ठ रोग, मुख रोग, मोटापा, खांसी, चोट, घाव, रक्‍त पित्‍त आदि रोगों को ठीक करने के लिए कत्था का इस्तेमाल किया जाता है।

मगर हां, लाल कत्‍थे का अधिक सेवन करने से नपुंसकता भी हो सकती है। इसके अलावा कत्‍थे के अधिक सेवन से किड़नी में पथरी की समस्या भी हो सकती है। इसलिये कत्‍थे का चूर्ण 1 से २ ग्राम ही सेवन करें।
कत्‍था से रूप-रंग निखार में भी मदद मिलता है

मलेरिया का बुखार का इजाज:

मेलरिया के बुखार के रोगी के अगर २ ग्राम सफेद कत्थे का सेवन करे तो मलेरिया का बुखार उतर जाता है। एक बात का ध्यान दें की यह गोली बच्‍चों तथा गर्भवती महिलाओं को ना दें।

दांतों की बीमारी:

खैर का दातुन या कत्‍थे को मंजन में मिला कर दांतों व मसूढ़ों पर रोजाना ब्रश करने से दांत सम्बन्धी सारे रोग दूर हो जाते हैं। दांतों के कीड़े कत्‍थे को सरसों के तेल में घोल कर रोजाना 2 से 3 बार मसूढ़ों पर मलने से दांतों के कीड़े पायरिया दूर हो जाते हैं और खून आना तथा बदबू भी ख़त्म हो जाती है।

खट्टी डकार:

१/२ ग्राम कत्‍था दिन में २ बार सुबह शाम लेने से खट्टी डकार आना बंद हो जाती है।

दस्‍त का इलाज:

१/२ ग्राम कत्‍थे का सेवन करने से दस्‍त लूजमोशन बंद होता हैऔर पाचन शक्‍ति भी मजबूत होती है।

बवासीर में लाभ:

सफेद कत्‍था, बड़ी सुपानी और नीलाथोथा बराबर मात्रा में लें। पहले सुपारी व नीलाथोथा को आग पर भून लें और फिर इस में कत्‍थे को मिला कर पीस कर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को मक्‍खन में मिला कर पेस्‍ट बनाएं। इस पेस्‍ट को रोज सुबह-शाम शौच के बाद 8 से 10 दिन तक मस्‍सों प लगाने से मस्‍से सूख जाते हैं।

गले की खराश:

300 मिलीग्राम कत्‍थे का चूर्ण मुंह में रख कर चूसने से गला बैठना, आवाज रूकना, गले की खराश और छाले आदि दूर हो जाते हैं। इसका दिन में 5 से 6 बार प्रयोग करना चाहिये।

कान दर्द की दावा:

सफेद कत्‍थे को पीस कर गुनगुने पानी में मिला कर कानों में डालने से कान दर्द दूर हो जाता है।
कुष्‍ठ रोग कत्थे के को उबल कर पानी में मिलाकर प्रति दिन नहाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

कटे घाव का इलाज
कटे चिली या चोट के घाव में से पस निकल रहा हो तो कत्थे को घाव पर लगाने से पस निकलना बंद हो जाता है तथा धीरे धीरे घाव सूखने लगता है।
योनि की जलन और खुजली
कत्‍था और हल्‍दी बराबर मात्र में ले कर पेस्ट बना कर योनि पर लगाएं। इससे खुजली और जलन आदि ठीक हो जाते हैं।

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