बबूल का पेड़ औषधि का खजाना है





बबूल जिसकी एक प्रजाति कीकर भी होती है , कुछ लोग मानते हैं की दोनों एक ही है लेकिन ऐसा नहीं है यह दोनों सामान गुण वाले एक प्रजाति के दो अलग पेड़ है . babul का पेड़ पुरे देश में पाया जाता है बबूल के फूल, पत्ते, छाल, फली, लकड़ी तथा गोंद आदि का प्रयोग प्राचीन काल से अनेकों बिमारियों के उपचार हेतु औषधि के रूप में किया जा रहा है | वैसे तो बबुल को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे
दीर्घकंटका, बबूल, बर्बर
बबूर, कीकर, बबूल गाछ
बाभूळ, माबुल, बाबूल
बबूर्रम, नेला, तुम्मा,नक दुम्मा
बाबला कारुबेल और इंग्लिश में इसे Thorn trees
बाबुल के फायदे गुण के बारे में  babul’s tree home remedy




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जी हां अगर हम बाबुल को आयुर्वेद का ENT स्पेस्लिस्ट कहे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि बाबुल के प्रयोग से आँख कान नाक गला दांत मुंह से सम्बंधित सभी बीमारी दूर भागते हैं: अगर आपके आँखों में जलन हो तो बबूल के पत्ते पीसकर उसका गोल टिकिया बना कर आँखों पर रखने से कुछ समय बाद आराम आ जाता है| अगर किसे के थूक में खून आता हो तो : बबूल के पत्ते को पीस कर सुबह-शाम पीने से खून आना बंद हो जाता है . अगर किसी के दांत में कोई परेशानी हो जैसे : बबूल के कपोल, सफेद जीरा व अनार की कली १ चुटकी लेकर बारीक पीसलें और पानी में मिला कर छान कर रख ले | इस पानी को दिन 3 बार पीयें इससे दंत सम्बन्धी रोग ठीक हो जाता है|  babul’s tree home remedy
ज्यादा पसीना :
बबूल के पत्तियों और छोटी हरड़ को मिला कर पिसलें और इसे नहाने से २० मिनट पहले अपने शरीर पर लगायें बाद में नहा ले | लगातार इस विधि को करने से कुछ दिनों बाद ज्यादा पसीना आना बंद हो जाता है|
कान में मवाद :
1 तोला बबूल के फल , २ तोला तिल के तेल में पकाए | फूल काले हो जाने पर तेल उताकर छान ले | 2-3 बूंद तेल कान में डाले यह कान के जख्म भरने तथा दर्द मिटाने की अचूक दवा है|

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