जो दवा खुद मर जाता हो क्या वह आपको जीवन दे सकेगा





प्रकृति ने अपने खजाने से हमें भरपूर मात्र में प्राकृतिक औषधि दिया है, जो इसे जानते है वे इसका भरपूर फायदा उठाते है और कुछ लोग इसे बकबास समझते है और इसे लोग डॉक्टर हॉस्पिटल में लाखों खर्च करने के बाद अंत में आयुर्वेद को अपनाते है तब उन्हें पता चलता है की हकीक़त में आयुर्वेद ही असली जीवन पद्धति को ठीक रख सकता है एलोपैथ की दवा एक्सपायर हो जाते है अर्थात कुछ समय बाद नाकाम हो जाते है use Ayurveda keep body healthy





जबकि आयुर्वेद का जडीबुटी जितना पुराना होता है उतना ज्यादा फायदा करता है . अब आपही सोचिये जो दवाई खुद एक्सपायर हो जाय वो हमें क्या बचा पायगे हाँ थोड़े दिनों के लिए राहत जरुर दे सकता है . लेकिन जडीबुटी में थोडा समय लगेगा परन्तु बीमारी को जड़ से ख़त्म करदेगा इसलिए मै आपको सलाह दूंगा की आप प्रकृति द्वारा देये गए वस्तुओं से अपना इलाज कीजिये तो स्वस्थ रहेंगे अन्यथा डॉ का चक्कर लगा कर परेशा हो जायेंगे use Ayurveda keep body healthy

जी हां दोष्तों यह तो हमारा बकबास था अब मैं आपको आज का नुस्खा बताने जा रहा हूँ.

आज हम आपको बताएँगे की आप अपने बच्चों के दिमाग को कैसे डेवेलोप करी उसके मेमोरी पोवार कैसे तेज करें ताकि वह आज कल के कोम्पिटीशन के दोड़ में आगे निकल सके जी हां इसी सन्दर्भ में आज हम आपको एक जंगली घास को दिखने जा रहे है आप

इसे गोर से पहचान लीजिये यह अन्नोखा घास है इसमें इतना ज्यादा गुण पाया जाता है की आप इसे जन कर हैरान रह जायेंगे, ये घास अक्सर ही खाली पड़ी जमीन में उगती है, और हम इसको बेकार जंगली घास समझ कर फेंक देते हैं. लेकिन इस जंगली घास को पुराने लोग नोनी लोणी, लोणा शाग, बड़ी लोणा, खुरसा,लुनाक, घोल, कुलफा, लोनक इत्यादि नामो से जानते है और इसका इस्तेमाल कई बिमारियों के इलाज के लिए करते थे. English में इसको Kaun Purslane common Purslane, , Pussley, Pigweed कहा जाता है.

दूध की चाय छोड़ ब्लैक टी पी तो, मिली इन बीमारियों से मुक्ति

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